
इंसान ही नहीं अब प्रोडक्ट का भी बनेगा पासपोर्ट : हर चीज की पूरी कुंडली होगी आपके फोन में!
नई दिल्ली। आने वाले समय में जब आप कोई भी चीज़ खरीदेंगे, चाहे वह मोबाइल हो, टी-शर्ट, या बच्चों का खिलौना, तो उसके साथ आपको एक डिजिटल पासपोर्ट मिलेगा, जिसमें उस चीज़ की पूरी कहानी दर्ज होगी। जी हां, अब हर प्रोडक्ट का “डिजिटल प्रोडक्ट पासपोर्ट” यानी #DPP होगा, जो बताएगा कि वो चीज़ बनी कहां, किससे बनी, कैसे बनी और पर्यावरण पर उसका क्या असर पड़ता है।
ये पासपोर्ट बिल्कुल आपके आधार या PAN कार्ड जैसा डिजिटल डॉक्यूमेंट होगा, बस फर्क इतना है कि ये किसी इंसान का नहीं, बल्कि प्रोडक्ट का होगा।
#DigitalProduct Passport से क्या फायदा होगा? मान लीजिए आपने एक जैकेट खरीदी। अब आप जान पाएंगे कि वह किस फैक्ट्री में बनी है? उसमें किस कपड़े का इस्तेमाल हुआ है? क्या वो पर्यावरण के लिए सुरक्षित है? और अगर फट जाए, तो उसे कैसे रिपेयर किया जा सकता है?
इससे न सिर्फ ग्राहक को पूरी जानकारी मिलेगी, बल्कि कंपनियों को भी अपनी कमियां छुपाने का मौका नहीं मिलेगा।
यूरोप से हुई शुरुआत, अब भारत भी तैयार
यूरोपीय देश इस सिस्टम को तेजी से अपना रहे हैं, खासकर बच्चों के खिलौनों और इलेक्ट्रॉनिक्स में। वहां हर प्रोडक्ट के साथ अब ये डिजिटल पासपोर्ट देना अनिवार्य किया जा रहा है।
भारत में अभी ऐसा सिस्टम शुरू नहीं हुआ है, लेकिन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि आने वाले वक्त में ये जरूरी हो जाएगा। खासतौर से जब लोग ‘मेड इन इंडिया’ सामान खरीदते वक्त यह जानना चाहें कि वो कितना टिकाऊ और भरोसेमंद है।
क्यों ज़रूरी है ये बदलाव?
आजकल लोग सिर्फ सस्ता नहीं, टिकाऊ और ईमानदार प्रोडक्ट भी चाहते हैं। डिजिटल पासपोर्ट से कंपनियों पर ज़िम्मेदारी बढ़ेगी और उपभोक्ता को ज्यादा अधिकार मिलेगा।
सीधा फायदा उपभोक्ता को
इससे हर चीज़ की असली जानकारी हाथ में होगी। झूठे दावे करने वाली कंपनियां बेनकाब होंगी। पुराने सामान को रिपेयर या रिसायकल करना आसान होगा।
सरकार और कंपनियों की नजरें टिकीं
भारत सरकार भी इस तकनीक में दिलचस्पी दिखा रही है, और कई स्टार्टअप पहले से इस तरह के समाधान तैयार कर रहे हैं। हो सकता है कि आने वाले एक-दो साल में ये सिस्टम भारत में भी लागू हो जाए।
तो अगली बार जब आप कोई चीज़ खरीदें, तो सोचिए – सिर्फ प्रोडक्ट नहीं, उसकी पूरी कहानी भी आपके पास होगी, वह भी एक क्लिक में!